बिहार में नई सरकार बनने के बाद मंत्रियों और विधायकों को सरकारी आवास यानी बंगला आवंटित करने की प्रक्रिया एक बार फिर सुर्खियों में है। दरअसल, नए मंत्रियों को उनके पद और प्रोटोकॉल के हिसाब से आवास दिए जा रहे हैं, जबकि पूर्व मंत्रियों और विपक्षी नेताओं के बंगले खाली कराए जा रहे हैं। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि सरकारी बंगले के आवंटन की विधिवत प्रक्रिया क्या है और कौन-सा विभाग इसके लिए जिम्मेदार होता है?
📌 मंत्रियों को बंगला कैसे मिलता है?
बिहार में मंत्रियों को आवास आवंटित करने की जिम्मेदारी बिहार भवन निर्माण विभाग (Building Construction Department - BCD) की होती है।
🔹 प्रोसेस इस तरह होती है—
1. मंत्रियों की सूची मुख्यमंत्री कार्यालय से BCD को भेजी जाती है।
2. विभाग उपलब्ध बंगलों की लिस्ट तैयार करता है।
3. CM की मंजूरी (Approval) के बाद संबंधित मंत्री को आवास अलॉट किया जाता है।
4. आवंटन के बाद मंत्री कार्यालय और परिवार के रहने योग्य आवश्यक मरम्मत/व्यवस्था की जाती है।
बंगला आमतौर पर दारोगा राय पथ, वीरचंद पटेल मार्ग, हार्डिंग रोड जैसे वीआईपी इलाकों में दिया जाता है।
📌 विधायकों का आवास कैसे तय होता है?
मंत्रियों के मुकाबले विधायकों की आवासीय सुविधा का प्रावधान अलग है।
🔹 आवंटन कौन करता है?
विधानसभा सचिवालय इस प्रक्रिया को संचालित करता है।
अंतिम मंजूरी विधानसभा अध्यक्ष (Speaker) की होती है।
🔹 प्रक्रिया इस प्रकार है—
1. विधायक आवेदन देता है या सचिवालय स्वचालित रूप से सूची भेजता है।
2. सचिवालय उपलब्ध MLA आवासों की लिस्ट तैयार करता है।
3. स्पीकर की अनुमति के बाद आवास आवंटित कर दिया जाता है।
Patna के MLA फ्लैट्स और डुप्लेक्स आवास आमतौर पर दारोगा राय पथ और अन्य सरकारी कॉलोनियों में होते हैं।
📌 बंगला खाली कराने की प्रक्रिया
नई सरकार बनते ही—
पूर्व मंत्रियों को 15–30 दिन के भीतर बंगला खाली करने का आदेश मिलता है।
यदि कोई खाली नहीं करता, तो BCD नोटिस भेजता है।
जरूरत पड़ने पर मजिस्ट्रेट और पुलिस बल की मौजूदगी में परिसर खाली कराया जा सकता है।
इसी कारण हर नई सरकार के समय आवास आवंटन को लेकर हलचल तेज हो जाती है।
📌 क्यों चर्चा में रहता है बंगला आवंटन?
✔ पूर्व मंत्रियों के बंगले देर तक कब्जे में रहने पर विवाद
✔ नए मंत्रियों को प्रीमियम लोकेशन वाले बंगले चाहिए होते हैं
✔ विपक्षी नेताओं को नेता प्रतिपक्ष का दर्जा मिलने पर बड़ा बंगला
✔ VIP रोड और दारोगा राय पथ पर सीमित बंगले
यही वजह है कि बिहार में हर कार्यकाल में आवास आवंटन राजनीति का चर्चित मुद्दा बन जाता है।
