पुतिन के भारत आते ही आई बड़ी खबर : भारत-रूस के बीच 2 बिलियन डॉलर की न्यूक्लियर सबमरीन डील पर मुहर

પ્રશાંત પ્રકાશ
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रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत पहुंच चुके हैं और इसी बीच दोनों देशों के बीच एक बेहद महत्वपूर्ण रक्षा समझौता सामने आया है। लंबे समय से लंबित न्यूक्लियर सबमरीन डील पर आखिरकार सहमति बन गई है। यह सौदा 2 बिलियन डॉलर (करीब 16,700 करोड़ रुपये) का है, जो भारत की समुद्री रक्षा क्षमता को और अधिक मजबूत करेगा।


10 साल से लंबित डील पर लगी मुहर

भारत और रूस के बीच इस न्यूक्लियर अटैक सबमरीन को लेकर लगभग एक दशक से बातचीत चल रही थी। कई बार तकनीकी और रणनीतिक कारणों से यह डील आगे नहीं बढ़ सकी, लेकिन पुतिन की भारत यात्रा के दौरान आखिरकार इसे अंतिम रूप दिया गया।

इस डील के तहत रूस भारत को एक अत्याधुनिक न्यूक्लियर पावर्ड अटैक सबमरीन (SSN) देगा, जो भारतीय नौसेना की शक्ति को कई गुना बढ़ा देगा।


क्या है डील की खासियत?

1. भारत को नई न्यूक्लियर पनडुब्बी की डिलीवरी अगले 2 साल में

रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह पनडुब्बी भारत को अगले दो वर्षों के भीतर मिल जाएगी। यह भारतीय नौसेना के लिए बड़ा सामरिक लाभ होगा, क्योंकि हिंद महासागर क्षेत्र में चीन की बढ़ती गतिविधियों पर नजर रखने में इसमें मदद मिलेगी।

2. रूस की उन्नत तकनीक का सहयोग

रूस, भारत का दशकों पुराना रक्षा साझेदार है। ब्रह्मोस मिसाइल, सुखोई जेट, टैंक और अब न्यूक्लियर सबमरीन — दोनों देशों का सहयोग लगातार बढ़ता रहा है।

इस सबमरीन डील के तहत

अत्याधुनिक सेंसर, लंबी रेंज वाले हथियार, स्टील्थ टेक्नोलॉजी, गहरे समुद्र में लंबे समय तक रहने की क्षमता, जैसी सुविधाएँ शामिल होंगी।

3. भारत की समुद्री सुरक्षा को मजबूती

यह सबमरीन भारतीय नौसेना की स्कॉर्पीन और अरिहंत क्लास की पनडुब्बियों के साथ मिलकर एक मजबूत अंडरवाटर फ्लीट तैयार करेगी।
इससे देश की डिटरेंस क्षमता भी बढ़ेगी और हिंद महासागर में भारत की पकड़ और मजबूत होगी।


भारत-रूस रक्षा संबंध होंगे और मजबूत

पुतिन की यात्रा सिर्फ एक डील तक सीमित नहीं है। माना जा रहा है कि भारत और रूस के बीच 

ऊर्जा सहयोग, व्यापार बढ़ोतरी, द्विपक्षीय रणनीतिक साझेदारी पर भी कई बड़े फैसले लिए जा सकते हैं।

भारत और रूस दशकों से रक्षा क्षेत्र में मजबूत सहयोगी रहे हैं, और यह डील उसी भरोसे का एक नया अध्याय है।

पुतिन के भारत पहुंचते ही न्यूक्लियर सबमरीन डील पर सहमति बनना दोनों देशों के लिए ऐतिहासिक कदम है।
2 बिलियन डॉलर का यह सौदा आने वाले वर्षों में भारत की समुद्री सुरक्षा को नई ऊंचाई देगा।

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