वैशाली | हाजीपुर औद्योगिक क्षेत्र में नकली शैक्षणिक पुस्तकों के अवैध कारोबार का एक बड़ा मामला सामने आया है। पुलिस की छापेमारी में नकली किताबें छापने के लिए इस्तेमाल होने वाली 150 प्रिंटिंग प्लेट्स बरामद की गई हैं। प्रारंभिक जांच में आशंका जताई जा रही है कि इन प्लेट्स के जरिए प्रसिद्ध प्रकाशन भारती भवन की लगभग ₹2 करोड़ मूल्य की नकली किताबें छापने की योजना थी।
सूत्रों के अनुसार, इन्हीं प्लेट्स के माध्यम से पहले ही करीब ₹1 करोड़ की नकली किताबें छापकर बाजार में सप्लाई किए जाने की सूचना भी सामने आई है, जिससे शिक्षा जगत और प्रकाशन उद्योग में हड़कंप मच गया है।
पुलिस का आधिकारिक इनकार, जांच जारी
इस मामले पर औद्योगिक थाना अध्यक्ष अरविंद पासवान ने फिलहाल किताबों और प्लेट्स की जब्ती से आधिकारिक रूप से इनकार किया है। उन्होंने कहा, “अभी फैक्ट्री में जांच-पड़ताल की जा रही है। यदि जांच में कोई ठोस तथ्य सामने आता है या संबंधित प्रकाशक की ओर से लिखित आवेदन प्राप्त होता है, तो प्राथमिकी दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।”
पहले भी दर्ज हो चुकी है प्राथमिकी
जानकारी के अनुसार, राजेश कुमार नामक प्रिंटर की फंडामेंटल प्रेस, जो चक धनौती यीशुपुर, हाजीपुर औद्योगिक क्षेत्र में स्थित है, पहले भी विवादों में रह चुकी है।
साल 2020 में इसी तरह के मामले में यहां एफआईआर दर्ज की गई थी।
वहीं, इसी नाम से पटना में संचालित फैक्ट्री पर भी साल 2022 में प्राथमिकी दर्ज हो चुकी है।
बार-बार सामने आ रहे ऐसे मामलों से यह सवाल उठने लगे हैं कि नकली किताबों के इस संगठित नेटवर्क पर अब तक सख्त कार्रवाई क्यों नहीं हो पाई।
शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर असर
नकली पुस्तकों का कारोबार न सिर्फ प्रकाशकों को आर्थिक नुकसान पहुंचाता है, बल्कि छात्रों की पढ़ाई और शिक्षा की गुणवत्ता पर भी सीधा असर डालता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते इस रैकेट पर लगाम नहीं लगी, तो यह समस्या और विकराल रूप ले सकती है।
फिलहाल पुलिस जांच के नतीजों और प्रकाशक की ओर से संभावित शिकायत पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं।
