बिहार में विधानसभा चुनाव के बाद अब पंचायत चुनाव 2026 की तैयारियाँ तेज हो गई हैं। इस बार का पंचायत चुनाव कई अहम बदलावों का साक्षी बनने वाला है। राज्य निर्वाचन आयोग ने चुनाव को और अधिक पारदर्शी, त्वरित और तकनीक आधारित बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है— पहली बार मल्टी पोस्ट EVM का उपयोग किया जाएगा।
🔹 क्या है मल्टी पोस्ट EVM?
मल्टी पोस्ट इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन ऐसी EVM है जिसमें एक ही मतदान केंद्र पर मौजूद मतदाता एक साथ कई पदों के लिए वोट डाल सकते हैं।
बिहार पंचायत चुनाव में आमतौर पर निम्न पदों के लिए मतदान होता है—
वार्ड सदस्य
पंच
मुखिया
सरपंच
जिला परिषद सदस्य
समिति सदस्य
अब इन सभी पदों के लिए अलग-अलग बैलेट यूनिट के माध्यम से एक ही बूथ पर क्रमवार मतदान कराया जाएगा।
🔹 इससे चुनाव प्रक्रिया में क्या बदलेगा?
1. पारदर्शिता बढ़ेगी – हर पद के लिए अलग EVM होने से विवाद की संभावना कम होगी।
2. मतगणना तेज होगी – मशीन आधारित मतदान से परिणाम समय पर मिलेंगे।
3. मतदान में सुविधा – मतदाता को लंबी कतार में दोबारा नहीं लगना पड़ेगा।
4. त्रुटियों की संभावना कम – मैनुअल बैलट पेपर की जगह EVM होने से गलतियों में कमी आएगी।
🔹 नए आरक्षण रोस्टर के अनुसार चुनाव
राज्य सरकार द्वारा तैयार किए गए नए आरक्षण रोस्टर के आधार पर ही 2026 का पंचायत चुनाव होगा। इसके अनुसार—
महिलाओं, पिछड़े वर्गों, अति पिछड़े वर्गों, SC-ST वर्ग के लिए सीटों का नया निर्धारण किया जा रहा है।
कई पंचायतों में पदों के आरक्षण की श्रेणी बदलेगी।
आयोग शीघ्र ही अंतिम आरक्षण सूची जारी करेगा।
🔹 आयोग की तैयारी
राज्य निर्वाचन आयोग ने जिला प्रशासन को निर्देश दिया है कि—
मल्टी पोस्ट EVM की ट्रेनिंग मतदान कर्मियों को दी जाए।
प्रत्येक पंचायत एवं मतदान केंद्र का भौतिक सत्यापन किया जाए।
मतदाता सूची का समय पर पुनरीक्षण पूरा किया जाए।
EVM की सुरक्षा और वेयरहाउसिंग की व्यवस्था मजबूत की जाए।
🔹 मतदाताओं के लिए क्या बदलने वाला है?
पहली बार मतदाता एक ही बूथ पर कई पदों के लिए EVM से मतदान करेंगे।
हर पद के लिए मशीन में अलग बटन और अलग बैलेट यूनिट होगी।
बूथ पर गाइडिंग चार्ट और चुनाव कर्मी सहायता उपलब्ध कराएंगे।
बिहार पंचायत चुनाव 2026 तकनीक और पारदर्शिता की दिशा में एक बड़ा कदम होगा। मल्टी पोस्ट EVM के उपयोग से न केवल प्रक्रिया आसान होगी, बल्कि चुनावी विवाद भी कम होंगे। नए आरक्षण रोस्टर के आने से कई पंचायतों की राजनीतिक तस्वीर में भी बदलाव देखने को मिलेगा।
