बिहार में तीन नए विभागों का गठन, कैबिनेट की बैठक में मिली मंजूरी

પ્રશાંત પ્રકાશ
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पटना | बिहार सरकार ने राज्य प्रशासनिक ढांचे को और सुदृढ़ तथा आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। मंगलवार को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में तीन नए विभागों के गठन को हरी झंडी दे दी गई। अब राज्य में कुल 45 विभागों के साथ 3 नए विभाग और शामिल हो जाएंगे। सरकार का मानना है कि प्रशासनिक कार्यों में विस्तार एवं बदलती जरूरतों को देखते हुए यह कदम आवश्यक था।

1. युवा, रोजगार एवं कौशल विकास विभाग का गठन

राज्य के युवाओं को अधिक से अधिक रोजगार उपलब्ध कराने, कौशल बढ़ाने और उन्हें आधुनिक प्रशिक्षण से जोड़ने के उद्देश्य से ‘युवा, रोजगार एवं कौशल विकास विभाग’ बनाया गया है।
यह विभाग—

रोजगार सृजन से जुड़ी नीतियों पर काम करेगा

युवाओं के लिए कौशल विकास कार्यक्रम संचालित करेगा

करियर, प्रशिक्षण एवं रोजगार अवसरों को एक ही प्लेटफॉर्म पर लाने का प्रयास करेगा

सरकार का कहना है कि इससे युवाओं का सर्वांगीण विकास होगा और रोजगार में बढ़ोतरी होगी।

2. उच्च शिक्षा विभाग का गठन

अब तक उच्च शिक्षा का प्रबंधन शिक्षा विभाग के अंतर्गत किया जाता था, लेकिन विश्वविद्यालयों एवं कॉलेजों के बढ़ते दायित्वों को देखते हुए एक अलग विभाग ‘उच्च शिक्षा विभाग’ बनाया गया है।

यह विभाग—

विश्वविद्यालयों और कॉलेजों से संबंधित सभी कार्यों का संचालन करेगा

उच्च शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने पर विशेष ध्यान देगा

नई शिक्षा नीति से जुड़े कार्यों का समन्वय करेगा

3. सिविल विमानन विभाग का गठन

राज्य में हवाई कनेक्टिविटी बढ़ाने और हवाई अड्डों के विकास को गति देने के लिए ‘सिविल विमानन विभाग’ की स्थापना की गई है।

अब तक यह कार्य सामान्य प्रशासन विभाग के अधीन था, लेकिन बढ़ती जरूरतों और बड़े प्रोजेक्ट्स को देखते हुए इसे एक स्वतंत्र विभाग बना दिया गया है।
यह विभाग—

राज्य में नए हवाई अड्डों एवं हेलीपैड के निर्माण का संचालन करेगा

हवाई सेवा विस्तार को बढ़ावा देगा

एयर कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने पर फोकस करेगा

अन्य महत्वपूर्ण निर्णय

पशुपालन व मत्स्य विभाग में भी परिवर्तन किया गया है। अब इसका नाम बदलकर ‘डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग’ कर दिया गया है, जिससे सभी संबंधित कार्य एकीकृत रूप से संचालित किए जा सकें।

सरकार का संदेश

एडीशनल मुख्य सचिव अरविंद कुमार चौधरी द्वारा जारी नोट में कहा गया है कि राज्य की बदलती प्रशासनिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए यह कदम पारदर्शी और कुशल शासन के लिए उठाया गया है।

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