नीतीश सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में ई-निबंधन प्रक्रिया को सरल, तेज और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक अहम कदम उठाया है। सरकार ने इस जिम्मेदारी को जीविका दीदियों को सौंपने का फैसला किया है। इसके तहत साक्षर जीविका दीदियां अब ‘डिजिटल दीदी सह सक्षमा दीदी’ के रूप में गांव-गांव जाकर लोगों को ई-निबंधन और अन्य ऑनलाइन सेवाओं से जोड़ेंगी।
सरकारी योजना के अनुसार, चयनित जीविका दीदियों को कंप्यूटर संचालन, इंटरनेट उपयोग और ई-निबंधन से जुड़ी ऑनलाइन प्रक्रियाओं का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद ये दीदियां ग्रामीणों को जमीन, मकान और अन्य जरूरी निबंधन सेवाओं की जानकारी देंगी और जरूरत पड़ने पर प्रक्रिया में सहायता भी करेंगी।
ग्रामीणों को मिलेगा सीधा लाभ
इस पहल से ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को अब निबंधन के लिए प्रखंड या जिला कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। गांव में ही डिजिटल दीदियों की मदद से ई-निबंधन संभव होगा, जिससे समय और धन दोनों की बचत होगी। साथ ही बिचौलियों की भूमिका भी खत्म होगी, जिससे प्रक्रिया और अधिक पारदर्शी बनेगी।
महिला सशक्तिकरण को भी बढ़ावा
यह योजना केवल प्रशासनिक सुधार तक सीमित नहीं है, बल्कि महिला सशक्तिकरण की दिशा में भी बड़ा कदम है। जीविका दीदियों को नई जिम्मेदारी और तकनीकी प्रशिक्षण मिलने से उनकी आय और सामाजिक भूमिका दोनों मजबूत होंगी। डिजिटल सेवाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से गांवों में डिजिटल साक्षरता को भी बढ़ावा मिलेगा।
पायलट प्रोजेक्ट से होगी शुरुआत
सरकार इस योजना की शुरुआत पायलट प्रोजेक्ट के रूप में करेगी। शुरुआती चरण में चुनिंदा जिलों और प्रखंडों में इसे लागू किया जाएगा। पायलट प्रोजेक्ट के सफल होने के बाद इसे पूरे राज्य में विस्तार देने की योजना है।
कुल मिलाकर, ‘डिजिटल दीदी’ पहल से जहां ग्रामीणों को घर के पास ही सरकारी सेवाएं मिलेंगी, वहीं जीविका दीदियां भी तकनीक के माध्यम से आत्मनिर्भर बनेंगी। यह पहल बिहार में डिजिटल गवर्नेंस और ग्रामीण विकास को नई दिशा देने वाली साबित हो सकती है।
