भारत ने आर्थिक क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए जापान को पीछे छोड़ दिया है और अब वह दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है। सरकार की साल के अंत में जारी आर्थिक समीक्षा (Economic Review) के अनुसार भारत की सकल घरेलू उत्पाद (GDP) बढ़कर 4.18 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गई है। यह उपलब्धि न केवल भारत की तेज़ आर्थिक वृद्धि को दर्शाती है, बल्कि वैश्विक स्तर पर उसकी बढ़ती ताकत का भी प्रमाण है।
लगातार सुधारों का नतीजा
बीते कुछ वर्षों में भारत की अर्थव्यवस्था ने कई अहम सुधार देखे हैं। बुनियादी ढांचे में बड़े निवेश, डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया, स्टार्टअप इकोसिस्टम का विस्तार और सेवा क्षेत्र की मजबूत भूमिका ने आर्थिक विकास को नई रफ्तार दी है। इसके साथ ही घरेलू मांग में बढ़ोतरी और निर्यात में सुधार ने भी GDP वृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
अब जर्मनी पर नजर
आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार भारत अगले 2.5 से 3 वर्षों में जर्मनी को पछाड़कर दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर तेजी से बढ़ रहा है। मौजूदा रफ्तार बनी रही तो यह लक्ष्य तय समय से पहले भी हासिल हो सकता है।
2030 तक बड़ी छलांग का अनुमान
अनुमानों के मुताबिक, भारत की GDP 2030 तक 7.3 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है। यह वृद्धि भारत को न केवल आर्थिक महाशक्ति बनाएगी, बल्कि वैश्विक नीति-निर्धारण में भी उसकी भूमिका और प्रभाव बढ़ाएगी।
IMF की अंतिम पुष्टि 2026 में
हालांकि इस उपलब्धि की अंतिम और औपचारिक पुष्टि 2026 में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के आंकड़ों के आधार पर होगी, लेकिन मौजूदा संकेत साफ बताते हैं कि भारत आर्थिक महाशक्तियों की अग्रिम पंक्ति में मजबूती से खड़ा हो चुका है।
जापान को पीछे छोड़ना भारत के लिए केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि यह उसकी आर्थिक नीतियों, युवा शक्ति और विकास के विज़न की सफलता का प्रतीक है। आने वाले वर्षों में भारत की यह आर्थिक उड़ान वैश्विक अर्थव्यवस्था की दिशा और दशा दोनों को प्रभावित करने वाली है।
