भारत और बांग्लादेश के बीच हाल के महीनों में आए तनावपूर्ण दौर के बीच एक अहम कूटनीतिक कदम देखने को मिल रहा है। भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की प्रमुख खालिदा जिया के जनाजे में शामिल होने के लिए ढाका जाएंगे। इसे नई दिल्ली की ओर से रिश्तों में संतुलन और संवाद बहाल करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
खालिदा जिया का निधन और क्षेत्रीय राजनीति पर असर
खालिदा जिया का मंगलवार तड़के निधन हो गया। वह बांग्लादेश की राजनीति की सबसे प्रभावशाली शख्सियतों में से एक थीं और दो बार देश की प्रधानमंत्री रह चुकी थीं। उनके निधन से न केवल बांग्लादेश की आंतरिक राजनीति में शून्य पैदा हुआ है, बल्कि दक्षिण एशिया की क्षेत्रीय राजनीति पर भी इसका असर पड़ना तय माना जा रहा है।
जयशंकर की मौजूदगी : कूटनीतिक संदेश
विदेश मंत्री जयशंकर का जनाजे में शामिल होना सिर्फ एक औपचारिक श्रद्धांजलि नहीं है, बल्कि इसके गहरे कूटनीतिक मायने हैं। यह संकेत देता है कि भारत बांग्लादेश की राजनीतिक धाराओं के साथ संवाद बनाए रखना चाहता है, चाहे सत्ता में कोई भी दल हो। विशेषज्ञ मानते हैं कि इससे दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली की दिशा में सकारात्मक संदेश जाएगा।
तारीक रहमान की वापसी और नए संकेत
खालिदा जिया के बेटे और BNP के वरिष्ठ नेता तारीक रहमान की सक्रिय राजनीति में वापसी और हालिया बयानों को भी भारत के लिए नई संभावनाओं के रूप में देखा जा रहा है। उनके रुख से यह संकेत मिल रहा है कि भविष्य में भारत-बांग्लादेश संबंधों में नए सिरे से संवाद और सहयोग की गुंजाइश बन सकती है।
पिछला तनाव और मौजूदा संदर्भ
गौरतलब है कि पिछले वर्ष बांग्लादेश में हुए छात्र विद्रोह के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना को भारत द्वारा शरण दिए जाने से दोनों देशों के संबंधों में तल्खी आ गई थी। इस पृष्ठभूमि में जयशंकर की ढाका यात्रा और खालिदा जिया के अंतिम संस्कार में भागीदारी को रिश्तों में संतुलन साधने की कोशिश माना जा रहा है।
आगे की राह
राजनयिक हलकों में यह उम्मीद जताई जा रही है कि यह कदम भारत-बांग्लादेश संबंधों में जमी बर्फ को पिघलाने में मदद कर सकता है। बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच नई दिल्ली का यह रुख यह भी दर्शाता है कि भारत पड़ोसी देशों के साथ रिश्तों में संवेदनशीलता और व्यावहारिकता दोनों को महत्व दे रहा है।
निष्कर्षतः खालिदा जिया के जनाजे में विदेश मंत्री एस. जयशंकर की मौजूदगी केवल शोक व्यक्त करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दक्षिण एशियाई कूटनीति में एक महत्वपूर्ण संकेत के रूप में देखा जा रहा है, जो आने वाले समय में भारत-बांग्लादेश संबंधों की दिशा तय कर सकता है।
