मकर संक्रांति के मौके पर राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख लालू प्रसाद यादव के परिवार में सियासी और पारिवारिक रिश्तों की नई शुरुआत देखने को मिली। लालू प्रसाद यादव अपने बड़े बेटे तेज प्रताप यादव के दही-चूड़ा भोज में पहुंचे और खुले मंच से यह संदेश दिया कि उनका आशीर्वाद हमेशा बेटे के साथ है। उन्होंने परिवार के भीतर हुए मतभेदों को सामान्य करार देते हुए स्पष्ट किया कि तेज प्रताप अब परिवार के साथ ही रहेंगे।
लालू प्रसाद का यह बयान ऐसे समय आया है, जब बीते सात महीनों से तेज प्रताप यादव परिवार से अलग-थलग माने जा रहे थे। उस दौरान सार्वजनिक रूप से यह चर्चा रही कि अनुशासनहीनता और बयानबाजी के चलते उन्हें परिवार और संगठन से दूरी बनानी पड़ी थी। लेकिन संक्रांति के अवसर पर लालू की मौजूदगी और उनके शब्दों ने साफ संकेत दे दिया कि रिश्तों की बर्फ पिघल चुकी है।
दही-चूड़ा भोज के दौरान लालू प्रसाद ने कहा कि “परिवार में मतभेद होते रहते हैं, लेकिन अंततः परिवार एकजुट रहता है।” इस बयान को तेज प्रताप की न सिर्फ पारिवारिक बल्कि राजनीतिक वापसी के संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है। कार्यक्रम में जिस तरह से पिता-पुत्र के बीच आत्मीयता दिखी, उसने लंबे समय से चल रही अटकलों पर विराम लगा दिया।
राजनीतिक गलियारों में भी इस घटनाक्रम को अहम माना जा रहा है। तेज प्रताप यादव की वापसी से राजद के भीतर संतुलन और संगठनात्मक एकजुटता मजबूत होने की उम्मीद जताई जा रही है। खासकर चुनावी माहौल में लालू परिवार की एकजुट तस्वीर पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए सकारात्मक संदेश मानी जा रही है।
संक्रांति के दिन दही-चूड़ा भोज के साथ रिश्तों में आई यह गर्मजोशी यह बताती है कि लालू परिवार में नई खिचड़ी पक चुकी है—जिसमें पुराने मतभेदों की जगह अब मेल-मिलाप और साथ चलने का संकल्प नजर आ रहा है।
