बिहार की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। पूर्व केंद्रीय मंत्री और जदयू (JDU) के कद्दावर नेता रहे आरसीपी सिंह के एक संक्षिप्त लेकिन अर्थपूर्ण बयान ने सियासी गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है।
दरअसल, आरसीपी सिंह अपने पुराने राजनीतिक रिश्तों और अनुभवों पर बातचीत कर रहे थे। इसी दौरान जब उनसे सीधे तौर पर जदयू में वापसी को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा—
“आपको पता चलेगा।”
बस इसी एक जवाब के बाद से कयासों का दौर शुरू हो गया है।
क्यों अहम है RCP सिंह की संभावित वापसी?
आरसीपी सिंह कभी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सबसे भरोसेमंद सहयोगियों में गिने जाते थे। पार्टी संगठन से लेकर केंद्र की राजनीति तक, जदयू में उनका कद काफी ऊंचा रहा है। हालांकि बाद के वर्षों में मतभेद सामने आए और अंततः उन्होंने जदयू से दूरी बना ली।
इसके बाद उन्होंने प्रशांत किशोर के नेतृत्व में बनी जन सुराज पार्टी का दामन थामा और नए सियासी सफर की शुरुआत की। ऐसे में उनका जदयू में लौटना, न सिर्फ पार्टी के भीतर बल्कि बिहार की समूची राजनीति के समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।
जन सुराज में भूमिका और भविष्य
फिलहाल आरसीपी सिंह जन सुराज पार्टी के सदस्य हैं। यह पार्टी खुद को वैकल्पिक राजनीति के मंच के तौर पर पेश कर रही है। लेकिन हालिया बयान के बाद यह सवाल उठने लगा है कि क्या आरसीपी सिंह वहां पूरी तरह सहज हैं या फिर पुराने राजनीतिक घर की ओर वापसी का मन बना चुके हैं।
जदयू की रणनीति पर क्या असर?
अगर आरसीपी सिंह की जदयू में वापसी होती है तो— पार्टी को एक अनुभवी संगठनात्मक नेता मिल सकता है, 2025 विधानसभा चुनाव से पहले जदयू अपनी भीतरी एकजुटता का संदेश दे सकती है। विपक्ष को एक नया सियासी संकेत जा सकता है, हालांकि जदयू नेतृत्व की ओर से फिलहाल इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
