वैशाली में आपदा से निपटने की तैयारी तेज : NDRF ने सिखाए जल बचाव, CPR और भूकंप सुरक्षा के गुर

પ્રશાંત પ્રકાશ
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वैशाली जिले में आपदा प्रबंधन को लेकर प्रशासनिक तैयारियों को और मजबूत करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) द्वारा चलाए जा रहे 9-दिवसीय विशेष प्रशिक्षण अभियान (फेमिलियराइजेशन एक्सरसाइज – FAMEX) का छठा दिन गुरुवार को सहदेई बुजुर्ग प्रखंड स्थित गांधी हाई स्कूल परिसर में आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम जिलाधिकारी वैशाली वर्षा सिंह के मार्गदर्शन में NDRF की 9वीं बटालियन द्वारा संपन्न कराया गया।

गंगा नदी के समीप स्थित होने के कारण सहदेई बुजुर्ग क्षेत्र बाढ़ के लिहाज से अत्यंत संवेदनशील माना जाता है। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रशिक्षण का मुख्य फोकस जल आपदा के दौरान बचाव कार्य और जीवन रक्षक तकनीकों पर रखा गया। NDRF के प्रशिक्षकों ने ग्रामीणों, पंचायत प्रतिनिधियों और स्कूली छात्रों को आपदा की घड़ी में बिना घबराए सुरक्षित तरीके से दूसरों की मदद करने के व्यावहारिक उपाय बताए।

घरेलू संसाधनों से लाइफ जैकेट बनाने का प्रशिक्षण

कार्यक्रम के दौरान NDRF टीम ने ग्रामीणों को यह सिखाया कि किस तरह घर में उपलब्ध साधारण चीजों से अस्थायी लाइफ जैकेट तैयार की जा सकती है। प्रशिक्षकों ने 2-लीटर की खाली प्लास्टिक बोतलों को रस्सी की मदद से जोड़कर लाइफ जैकेट बनाने का लाइव डेमो दिया। इसका उद्देश्य यह संदेश देना था कि आपदा के समय संसाधनों की कमी के बावजूद सूझबूझ से जान बचाई जा सकती है।

डूबते व्यक्ति को बचाने के सुरक्षित तरीके

जल बचाव सत्र में यह भी बताया गया कि डूबते व्यक्ति को बचाते समय खुद को खतरे में डाले बिना कैसे सहायता की जाए। लंबी छड़ी, रस्सी या कपड़े की मदद से सुरक्षित दूरी बनाकर बचाव करने का प्रदर्शन किया गया, ताकि बचावकर्ता भी सुरक्षित रह सके।

भूकंप से बचाव और मलबा हटाने की तकनीक

कार्यक्रम में भूकंप सुरक्षा पर भी विशेष सत्र आयोजित किया गया। छात्रों और स्थानीय लोगों को “ड्रॉप-कवर-होल्ड ऑन” तकनीक का अभ्यास कराया गया। इसके साथ ही मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित तरीके से निकालने (लिफ्टिंग एंड मूविंग) के उपाय भी बताए गए।

CPR और ‘गोल्डन आवर’ का महत्व

NDRF टीम द्वारा प्राथमिक चिकित्सा के अंतर्गत CPR (कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन) का लाइव डेमो भी दिया गया। दिल का दौरा पड़ने या सांस रुकने की स्थिति में शुरुआती 10 मिनट यानी ‘गोल्डन आवर’ को सबसे महत्वपूर्ण बताते हुए टीम ने कहा कि इस समय सही कदम उठाने से कई जिंदगियां बचाई जा सकती हैं।

हर घर में ‘आपदा मित्र’ बनाने का लक्ष्य

इस अवसर पर जिलाधिकारी वर्षा सिंह ने कहा कि प्रशासन का उद्देश्य हर घर में एक ‘आपदा मित्र’ तैयार करना है, जो आपात स्थिति में अपने परिवार और पड़ोसियों की मदद कर सके। वहीं NDRF टीम कमांडर ने युवाओं से अपील की कि वे प्रशिक्षण में सीखी गई तकनीकों को दूसरों तक पहुंचाएं, ताकि आपदा के समय जान-माल के नुकसान को न्यूनतम किया जा सके।

भारी संख्या में सहभागिता

इस शिविर में स्थानीय ग्रामीणों, पंचायत प्रतिनिधियों और स्कूली बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रतिभागियों ने न सिर्फ प्रशिक्षण देखा, बल्कि स्वयं अभ्यास कर अपने आत्मविश्वास को भी बढ़ाया। लोगों का कहना था कि इस तरह के कार्यक्रम आपदा के समय घबराहट कम करने और सही निर्णय लेने में बेहद मददगार साबित होते हैं।

कुल मिलाकर, सहदेई बुजुर्ग में आयोजित यह प्रशिक्षण अभियान जिले में आपदा प्रबंधन को लेकर जागरूकता और तैयारियों को नई मजबूती देने वाला रहा।

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