बिहार सरकार ने राज्य में संचालित निजी प्रारंभिक विद्यालयों की मान्यता प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और गुणवत्तापूर्ण बनाने के उद्देश्य से नई मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) लागू कर दी है। यह SOP निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम (RTE Act) के प्रावधानों के अनुरूप तैयार की गई है, ताकि बच्चों को बेहतर और सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण मिल सके।
नई व्यवस्था के तहत अब किसी भी निजी स्कूल को मान्यता देने से पहले कई अहम मानकों की गहन जांच की जाएगी। सरकार का स्पष्ट उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विद्यालय केवल व्यवसाय न बनें, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता और बच्चों के अधिकारों की रक्षा प्राथमिकता हो।
इन बिंदुओं पर होगी सख्त जांच
नई SOP के अनुसार निजी विद्यालयों को मान्यता पाने के लिए निम्नलिखित शर्तों को पूरा करना अनिवार्य होगा—
शिक्षकों की निर्धारित संख्या और उनकी शैक्षणिक योग्यता
छात्र-शिक्षक अनुपात (PTR) का पालन
कक्षा कक्ष, शौचालय, पेयजल, पुस्तकालय जैसी शैक्षणिक व आधारभूत सुविधाएं
विद्यालय भवन की सुरक्षा और संरचनात्मक मानक
RTE अधिनियम के तहत आवश्यक दस्तावेज़ और नियमों का अनुपालन
DEO के नेतृत्व में होगी निरीक्षण प्रक्रिया
नई SOP के तहत मान्यता से पूर्व विद्यालयों की जांच के लिए जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) के नेतृत्व में तीन सदस्यीय निरीक्षण टीम गठित की जाएगी। यह टीम मौके पर जाकर स्कूल की भौतिक स्थिति, शैक्षणिक संसाधन और शिक्षकों की उपलब्धता की जांच करेगी। रिपोर्ट संतोषजनक पाए जाने पर ही विद्यालय को मान्यता दी जाएगी।
मनमानी पर लगेगी रोक
शिक्षा विभाग का मानना है कि इस नई SOP से फर्जी या मानकविहीन स्कूलों पर रोक लगेगी, अभिभावकों को बच्चों की शिक्षा को लेकर भरोसा मिलेगा, निजी विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा।
सरकार ने साफ किया है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले विद्यालयों के खिलाफ सख्त कार्रवाई भी की जा सकती है, जिसमें मान्यता रद्द करना शामिल है।
शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की पहल
बिहार सरकार की यह पहल राज्य में प्रारंभिक शिक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। नई SOP से यह उम्मीद की जा रही है कि निजी विद्यालयों की जवाबदेही बढ़ेगी और बच्चों को सुरक्षित, समावेशी व गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अधिकार सुनिश्चित हो सकेगा।
