केंद्र सरकार ने देश के सबसे बड़े ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम मनरेगा (Mahātmā Gandhi National Rural Employment Guarantee Act) का नाम बदलकर अब “पूज्य बापू ग्रामीण रोजगार योजना” कर दिया है। यह निर्णय न केवल प्रशासनिक बदलाव है, बल्कि ग्रामीण विकास की दिशा में एक नई सोच और नए विज़न की शुरुआत है। रोजगार दिवस बढ़ाने से लेकर भारी बजट आवंटन तक—सरकार ने कई महत्वपूर्ण परिवर्तन किए हैं, जिनका सीधा लाभ ग्रामीण गरीब परिवारों को मिलेगा।
🔹 क्या है नया बदलाव?
1. योजना का नया नाम
सरकार ने मनरेगा का आधिकारिक नाम बदलकर
👉 “पूज्य बापू ग्रामीण रोजगार योजना” कर दिया है।
यह नाम महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज और श्रम आधारित विकास के सिद्धांतों को सम्मान देता है।
🔹 योजना में क्या-क्या बदला?
2. काम के दिनों में बढ़ोतरी
पहले मनरेगा के तहत
✔ ग्रामीण परिवारों को 100 दिन रोजगार की गारंटी मिलती थी।
अब नई योजना में
➡ 125 दिन का रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा।
यह बदलाव ग्रामीण मजदूरों की आय में वृद्धि और अधिक स्थायी रोजगार सुनिश्चित करने के लिए किया गया है।
3. भारी बजट आवंटन
सरकार ने इस योजना के लिए
💰 1.51 लाख करोड़ रुपये का बड़ा बजट निर्धारित किया है।
यह अब तक का सबसे बड़ा वित्तीय आवंटन माना जा रहा है, जिससे अधिक रोजगार सृजन और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर विकास संभव होगा।
🔹 योजना का उद्देश्य
पूज्य बापू ग्रामीण रोजगार योजना का मुख्य लक्ष्य है—
ग्रामीण परिवारों को वर्ष भर में न्यूनतम आय की सुरक्षा देना
गांवों में स्थायी इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास
जल संरक्षण, सड़क निर्माण, तालाब खुदाई, वृक्षारोपण जैसे कार्यों के माध्यम से स्थानीय विकास
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाना
प्रवासी मजदूरों का शहरों पर निर्भरता कम करना
🔹 क्यों किया गया नाम परिवर्तन?
सरकार के अनुसार—
▪ गांधीजी की ग्रामीण रोजगार आधारित सोच को सम्मान देना
▪ योजना की मूल भावना को नई पहचान देना
▪ आधुनिक ग्रामीण भारत के विकास मॉडल के अनुरूप लाना
साथ ही यह बदलाव राजनीतिक, प्रशासनिक और आर्थिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
🔹 ग्रामीण गरीबों को क्या फायदा होगा?
125 दिन रोजगार मिलने से मजदूरों की आय बढ़ेगी
बेहतर भुगतान और काम की अधिक उपलब्धता
गांवों में स्थायी संपत्ति (durable assets) का निर्माण
बेरोजगारी में कमी
महिला मजदूरों को भी अधिक अवसर
गांव छोड़कर शहर जाने की मजबूरी कम होगी
🔹 आलोचनाएं और चुनौतियाँ
कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि—
नाम बदलने से ज्यादा जरूरी क्रियान्वयन में सुधार है
मजदूरों को समय पर भुगतान अभी भी बड़ी चुनौती है
वास्तविक सुधार तभी होगा जब
➤ पारदर्शिता
➤ तकनीकी निगरानी
➤ स्थानीय स्तर पर जवाबदेही
बेहतर होगी
पूज्य बापू ग्रामीण रोजगार योजना ग्रामीण भारत के लिए एक नया मोड़ है।
काम के दिनों में वृद्धि, बड़े बजट का आवंटन और महात्मा गांधी की सोच को आगे बढ़ाना—ये सभी संकेत देते हैं कि यह योजना अब और मजबूत होगी। यदि सरकार इसका प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करती है, तो यह आने वाले वर्षों में ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन सकती है।
