देश की सबसे पुरानी पर्वत श्रृंखलाओं में शामिल अरावली पहाड़ियों की ऊंचाई-आधारित नई परिभाषा को लेकर सियासी और सामाजिक विवाद तेज हो गया है। अरावली के अस्तित्व को लेकर हरियाणा के गुरुग्राम में जोरदार विरोध प्रदर्शन देखने को मिला।
यह प्रदर्शन हरियाणा सरकार में कैबिनेट मंत्री राव नरबीर सिंह के निवास के बाहर किया गया, जहां बड़ी संख्या में पर्यावरण प्रेमी, सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय नागरिक हाथों में बैनर-पोस्टर लेकर पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने ‘अरावली बचाओ, देश बचाओ’, ‘प्रकृति से खिलवाड़ बंद करो’ जैसे नारे लगाए।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि अरावली की ऊंचाई के आधार पर नई परिभाषा तय करने से इस प्राचीन पर्वत श्रृंखला का बड़ा हिस्सा कानूनी संरक्षण से बाहर हो सकता है, जिससे खनन, निर्माण और पर्यावरणीय नुकसान को बढ़ावा मिलेगा।
विरोध कर रहे लोगों का कहना है कि अरावली न केवल हरियाणा बल्कि पूरे उत्तर भारत के पर्यावरण संतुलन, जल संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण के लिए बेहद अहम है। उन्होंने सरकार से इस फैसले पर पुनर्विचार करने और अरावली को पूर्ण संरक्षण देने की मांग की है।
फिलहाल प्रशासन की ओर से स्थिति पर नजर रखी जा रही है, जबकि आंदोलन के और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।
