मध्य प्रदेश के इंदौर में दूषित पानी पीने से अब तक 12 लोगों की मौत का मामला गंभीर होता जा रहा है। इस संवेदनशील मुद्दे पर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के बयान ने सियासी और सामाजिक हलकों में नया विवाद खड़ा कर दिया है।
मामले को लेकर जब एक रिपोर्टर ने मंत्री से सवाल किया तो उन्होंने नाराज़गी जताते हुए कहा, “अरे छोड़ो यार, तुम फोकट सवाल मत पूछो।” रिपोर्टर के दोबारा सवाल करने पर मंत्री ने आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया और बिना जवाब दिए वहां से चले गए। इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिसके बाद विपक्ष और आम जनता ने कड़ी प्रतिक्रिया दी।
घटना पर बढ़ते दबाव के बीच मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने बाद में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर अपने शब्दों पर खेद जताया। उन्होंने लिखा कि उनका आशय किसी को आहत करने का नहीं था और यदि उनके शब्दों से किसी को ठेस पहुंची है तो उन्हें इसका दुख है।
वहीं, इंदौर प्रशासन ने दूषित पानी से हुई मौतों की जांच के आदेश दे दिए हैं। प्रभावित इलाकों में जल आपूर्ति बंद कर वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है और दोषियों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है। हालांकि, सवाल यह भी उठ रहा है कि जब आम लोगों की जान जा रही है, तब जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी और संवेदनशीलता कहां है।
यह मामला अब सिर्फ स्वास्थ्य संकट तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सत्ता में बैठे लोगों की जवाबदेही और भाषा पर भी बहस का मुद्दा बन गया है।
